वेदों वाले ऋषिवर तेरी शान का
तर्ज – बहर तवील
वेदों वाले ऋषिवर तेरी शान का
सारी दुनियां में कोई बशर न मिला।
हमने इनसान देखे सुने हैं
बड़े कोई इनसान तुझसा मगर न मिला।।
वेदों वाले ऋषिवर तेरी शान का …..
तू दया और आनन्द ही सब जगह
सच्चा हमदर्द बन के लुटाया गया।
चुन लिए तूने कांटे सभी राह के
फूल इस पर बिछाता गया।।
वेद मार्ग हमें तूने दिखला दिया
तेरे जैसा कोई राहबर न मिला।
वेदों वाले ऋषिवर तेरी शान का …..
कितना पानी है यह जानने के लिए
मैं समन्दर में गोता लगाऊं तो क्या।
या दिखाने को सूरज चमकता हुआ
एक छोटा सा दीपक जलाऊं तो क्या।।
तेरी तारीफ़ कैसे करूं मैं बयां
मेरी वाणी को ऐसा असर न मिला।
वेदों वाले ऋषिवर तेरी शान का …..
तूने दरिया बहाया है जो ज्ञान का
वह प्रलय तक निरन्तर बहेगा यहां ।
कोई ताकत इसे रोक सकती नहीं
दिन प्रतिदिन यह बढ़ता रहेगा यहां।।
जो प्रभावित न हो तेरे उपकार से
देश भर में कोई एक घर न मिला।
वेदों वाले ऋषिवर तेरी शान का …..
धर्म की राह पर मुस्कराते हुए
ज़िन्दगी मौत का खेल खेला गया ।
तेरी हिम्मत हिमालय से ऊंची बड़ी
तू हज़ारों के अन्दर अकेला गया।।
न झुका हो ’पथिक’ जो तेरे सामने
कोई दिल न मिला कोई सर न मिला।
वेदों वाले ऋषिवर तेरी शान का …..










