हम आए तेरे द्वारे, तेरे दरस की प्यास मन में जगा
तू ही माता पिता तू ही बन्धु सखा,
तारे तो तू ही तारे ॥ हम आए तेरे…
ना मानी प्रभु आज्ञा तेरी, की मनमानी बिना विचारे
पल पल छिन छिन घिरघिर, आए दुःख के बादर कारे कारे
तेरी महाशक्ति के आगे शीश झुकाए रह गए सारे
तेरी दया ने इतने तारे जितने न होगे नभ में तारे ॥ हम आए तेरे…
जब जब प्रेम के दीप जलाए क्रोध द्वेष के तूफाँ आए
लोभ ने अपने जाल विछाए मोह से पग पग हम भरमाए
आत्मिक धृत दिया ज्ञान दीप को बुझे द्वीप अब पुनः जलाए
दीप-शिखा सम विछे हुए हैं तब मारग में नैन हमारे ॥ हम आए तेरे…
कैसे स्वामिन् तुम्हें रिझाऊँ कैसे मन की व्यथा बताऊँ
वाणी में निरसता मेरी किसविध तेरे गीत मैं गाऊँ
तू अनन्त अपार है भगवन् कैसे तेरी थाह मैं पाऊँ
पार उतारो नैया खिवैया अब तो डोल रही मँझधारे ॥ हम आए तेरे…
(निरसता) भावनाहीन (थाह) हद, परिमिती










