कई जन्मों से कृपा तू ही किए जाता है
मैं सदा तुझसे ही मागू तू मेरा दाता है ॥ मैं सदा ॥
गीत तेरे गाएँगे हम बैठे चरणों में भगवन्
तेरी छाया में रहें और करें खुद को अर्पण
मन तेरे प्रेम का अनुभाव लिए जाता है ॥ मै सदा ॥
प्रीत जो प्रभु से लगी जा के अन्तर में जगी
ध्यान जब उसमें लगा मन में एक ली सी जली
ये हृदय तेरा ही उपजाप किए जाता है ॥ मै सदा ॥
ज्ञान से जागे ये मन ध्यान से होवे चिन्तन
मन चित्त वश में होवे क्यों न होवें प्रभु के दर्शन
तेरा अनुभाव ही मतिमाह किए जाता है ॥ मै सदा ॥
साँस और धड़कन मेरी ओ३म् नाम बोल रही
ओ३म के रंग में रंगी घट घट डोल रही
ओरम् का ध्यान ही उमाह दिए जाता है ॥ मै सदा ॥
(अनुभव) प्रभाव, संकेत, तेज, महात्म्य (उपजाप)मौन जाप (मतिमाह) मतिवान, बुद्धिमान (उमाह) तरंग, लहर










