“कुसुमस्तवकस्यैव द्वे गती तु मनस्विनः।
मूष्णिं वा सर्वलोकस्य विशीर्यन्ते वनेऽथवा।।”
(महापुरुषों के लिए दो ही मार्ग हैं – या तो संसार को सुवासित करना या फिर वीरगति पाकर अपने को अर्पित कर देना।)
🌾 परिचय एवं जन्मभूमि
उत्तर प्रदेश के जिला सहारनपुर में स्थित रामपुर ग्राम, रुड़की नगर से पश्चिम दिशा में मात्र एक मील पर बसा एक सूर्यवंशी ठाकुरों का गांव है। वहीं के नररत्न थे – महाधन श्री ठाकुर मलखानसिंह। उनके शरीर में पूर्वजों का उष्ण स्वराज्य रक्त प्रवाहित था। वे कांग्रेस के स्वातंत्र्य आन्दोलन में सक्रिय रूप से भाग ले चुके थे और कई बार कारावास भुगत चुके थे।
👨👩👦 परिवार एवं शिक्षा
पिता: श्री ठा० दलवीरसिंह जी
माता: श्रीमती नवली देवी (जब मलखानसिंह 15 वर्ष के थे, तभी उनका देहांत हो गया)
भाई: तीन – श्री हंसराज (बड़े), श्री स्वरूपसिंह (छोटे), और स्वयं मलखान (मंझले)
शिक्षा: मैट्रिक तक अध्ययन किया
वृत्ति: कृषिकर्मी जीवन, परंतु हृदय में राष्ट्रीय चेतना की ज्वाला
✊ हैदराबाद सत्याग्रह में योगदान
जब हैदराबाद सत्याग्रह आन्दोलन प्रारम्भ हुआ, तो उन्होंने अपना सर्वस्व अर्पण कर दिया।सहारनपुर से सर्वाधिक सत्याग्रही भेजने का श्रेय इन्हीं के साहस, संगठन और तपस्या को जाता है।जब रुड़की से पहला जत्था प्रस्थान करने वाला था, तो उन्होंने स्वयं उस जत्थे में सम्मिलित होकर बलिदान का संकल्प लिया।उनकी धर्मपत्नी मायके में थीं, किन्तु उन्होंने सत्याग्रह की सूचना तक नहीं दी – यह सिद्ध करता है कि उनका जीवन अब धर्म और देश को अर्पित हो चुका था।
🚩 सत्याग्रह, गिरफ्तारी और बलिदान
श्री देवव्रत वानप्रस्थी के जत्थे के साथ वे पुसद केन्द्र पहुंचे और वहाँ से सत्याग्रह किया।नांदेड़ (जहाँ श्री गुरु गोविंद सिंह जी ने अमरत्व को प्राप्त किया था) में उन पर मुकदमा चला।उन्हें एक वर्ष का सश्रम कारावास हुआ।बाद में चञ्चलगुडा जेल में भेजा गया। वहाँ की कठोर परिस्थितियों ने उनके दृढ़ शरीर को भी दुर्बल बना दिया।1 जुलाई 1939 को उन्होंने शरीर का परित्याग किया।जेल की श्मशान भूमि में ही गुपचुप अंतिम संस्कार कर दिया गया।जेल अधिकारियों ने इस बलिदान की खबर को छिपाने की कोशिश की, परंतु पाप स्वयं ही उद्घाटित हो जाते हैं।”
💔 परिवार की महानता
उनके वृद्ध पिता आज भी जीवित हैं। सार्वदेशिक सभा द्वारा सहायता स्वरूप दी जाने वाली पेंशन को उन्होंने अस्वीकार कर दिया, यह कहकर कि हमने बेटे को देश पर अर्पित किया है, बदले में कुछ नहीं चाहिए।”
🕊 श्रद्धांजलि संदेश
धर्मवीर ठाकुर मलखानसिंह का जीवन भारतीय इतिहास में बलिदान और स्वाभिमान का अमर उदाहरण है।उनका संकल्प, त्याग, और आत्म-न्यौछावर करना आज के युवाओं के लिए प्रेरणा का पुंज है।










