मन में जो ओ३म् समाए जीवन नैया तर जाए
पैसे में प्रभु तेरे दर्शन इक रंग रँगाए ॥ मन में जो…
तेरी दया से भगवन् तर गए अनेकों मुनिजन
तेरे ही ध्यान में प्रभुजी सुध विसार भूले तनमन
तेरी लगन प्रभुजी अपने दिल में लगा लूँ ॥ मन में जो…
बल बुद्धि विद्या दे दो, वेदों की शिक्षा दे दो
धर्म पे चलने की प्रभुजी परिपूर्ण इच्छा दे दो
निष्काम कर्म से अपना जीवन सजा लूँ ॥ मन में जो…
दर्शन के प्यासे नैया तुझ बिन ना पाएँ चैना
ऐ मन ये तुझसे कहना प्रभु आस में ही रहना
आसन बिछा मन मन्दिर में तुझको बिठा लूँ ॥ मन में जो…
ओ३म् गुणों की है खान आनन्दरूप सुख धाम
वेदों ने गाया गुणगान ओ३म् ही जीवन कल्याण
ओ३म् की ज्योति अपने मन में जगा लूँ ॥ मन में जो…
रेसना तू जपले ओ३म् नाम, भज मन तू प्रातः और शाम
भक्ति का पा ले वरदान चरणों में देंगे प्रभु स्थान
घट श्वास रोम रोम में प्रभु को रमा लूँ ॥ मन में जो…
तेरे समर्पण हूँ मैं बलिहार तुझपर हूँ मैं
तेरी ही महिमा गाऊँ अपरम्पार तू है
सव तेरा, तू मेरा तुझको मैं पा लूँ ॥ मन में जो…
(घट) हृदय (अपरम्पार) जिसका पार न पाया जा सके










