श्रद्धा सुमन लाए प्रभु तेरे चरणों में हम

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श्रद्धा सुमन लाए प्रभु तेरे चरणों में हम

तर्ज : ये रात ये तन्हाईयाँ

श्रद्धा सुमन लाए प्रभु तेरे चरणों में हम

उज्जवल करो जीवन प्रभु निष्पाप हो अन्तर्मन ॥ श्रद्धा सुमन…

हम जब भी माया में फँसने लगे

और लोभ मोह में धँसने लगे

सौ सौ दफा रोके कदम, तूने प्रभु हरदम (2) ॥ श्रद्धा सुमन…

सन्मार्ग में जब आने लगे, तेरी दया हम पाने लगे

मन में हुआ विश्वास के, प्रभु राह करेंगे सुगम ॥ श्रद्धा सुमन…

ओ३म् नाम मुख से जपने लगे, प्रीतम प्रभु तुम अपने लगे

चाहत यूँ ही मन में रहे, पाएँ प्रभुके चरनन ॥ श्रद्धा सुमन…

अर्पण कर दें सर्वस्व प्रभु, छोड़ें तृष्णा वैमनस्य प्रभु

रसना भी भक्तिभाव से, गाए तेरी सरगम ॥ श्रद्धा सुमन…

(रसना) जीहा, जीभ, जवान (निष्पाप) पाप रहित, निर्दोष (सन्मार्ग) सत्यमार्ग (वैमनस्य) शत्रुता,

ईर्ष्या, (सुगम) सरल, आसान