मेरी रसना में हे दाता सुधारस ओ३म् का भर दे
तर्ज: मेरी तकदीर के मालिक
तेरे दर्शन की आशा लेके आया हूँ चरणों में तेरे
हे अन्तर्यामी ! प्रभु प्यारे, तुम आओ मन मन्दिर मेरे ॥
मेरी रसना में हे दाता सुधारस ओ३म् का भर दे
तेरी भक्ति में लागे मन दया ऐसी प्रभु कर दे ॥ मेरी रसना ॥
मुझे लगता है सच्चा कोई भी साथी नहीं अपना
मुझे तो आसरा तेरा हितैषी तू सदा मेरा मेरे
विश्वास श्रद्धा भक्ति में शक्ति प्रभु भर दे ॥ मेरी रसना
मेरा मन दुर्गुणों से दूर प्रभुजी तुम सदा रखना
जो मेरा मन भटक जाए तो मार्ग सही दिखा देना
कुछ ऐसा करके तेरा प्रेम मेरे मन में घर कर ले ॥ मेरी रसना ॥
मेरे निष्काम कर्मों से जो होता हो भला मुझसे
तो लेनी होगी परहित की कठिन शिक्षा प्रभु तुमसे
मेरे मन वचन कर्मों को प्रभु जी सार्थक कर दे ॥ मेरी रसना ॥
मेरे बढ़ते हुए कदमों को प्रभुजी सही दिशा देना
तेरे चरणों में ले आए वो अमृत पथ दिखा देना
सुधा सागर न भर गागर, भले इक बूँद ही दे दे ॥ मेरी रसना ॥
(सार्थक) सफल,सिन्द्व, गुणकारी (गागर) छोटा घड़ा, गगरी (अमृत पथ) अमरता का रास्ता (सुधारस)
अमृतरस (परहित) दूसरे का कल्याण










