जो तू माँगे सच्चे मन से ईश्वर तुझको देता है
देने को भण्डार भरे पर बदले में ना कुछ लेता है ॥ जो तू माँगे..
क्या करने तू जग में आया सोच ले बन्दे निज मन से
जीवन भर करता मनमानी, देर हुई तब चेता है ॥ जो तू माँगे…
जो तू माँगे धन दौलत, पुरुषार्थ करे प्रभु से पाए
पर कितनी है तुझको, जरूरत,कितना जमा कर लेता है ॥ जो तू माँगे…
जो तू हर ले पीर पराई, तेरी पीर हरे हरिहर
सबसे प्रीत करे जो मन से, जिन्दा दिल वो होता है ॥ जो तू माँगे…
तेरी करनी को ना रोके जो चाहे करना कर ले
लेकिन फल ना तेरे वश, प्रभु नाप तोल के देता है ॥ जो तू माँगे…
करले साधु सन्तों की संगत, रंगत ज्ञान की पाले तू
ज्ञानी धर्म को जान समझकर जीवन नैया खेता है ॥ जो तू माँगे…
चरण शरण प्रभु चित्त जो लाए रतन अमोलक प्रभु से पाए
भक्ति में जो रम जाए तनमन, भव सागर तर लेता है ॥ जो तू माँगे…
(अमोलक) बहुमूल्य (पीर) पीड़ा, दुःख वेदना (खेता) पार लगाना (रंगत) आनन्द










