“धर्म हेतु जिसने प्राण अर्पित किये, उसका जीवन सदा अमर रहता है।”
“सब भला उसका भुवन में, अन्त जिसका भला,
जीव पहुँचेगा वहीं तो, वह जहां से चला।”
🏡 जन्म, परिवार एवं जीवन परिचय
चौधरी मातुराम जी का जन्म संवत् 1946 में हरियाणा के जिला हिसार, तहसील हांसी, डा० नारनोंद क्षेत्र के ग्राम मालिकपुर में हुआ। आपके पिता का नाम श्री गूगनसिंह जी और माता का नाम श्रीमती बूजी देवी जी था। आप शिवरान गोत्र के जाट परिवार से थे। परिवार कृषि पर आधारित था, 650 बीघा नहरी भूमि के आप स्वामी थे।16 वर्ष की आयु में आपका विवाह जींद रियासत के मौजा किला जफ्फरगढ़ निवासी श्रीमती वस्तावरी देवी जी से हुआ। आपके पाँच पुत्र — हरिसिंह, प्रभुदयाल, सोहनसिंह, भीमसिंह, फूलसिंह और दो पुत्रियाँ — भगवानी देवी एवं राजकौर देवी हैं।
🕉 आर्यसमाज एवं सामाजिक सेवा
चौधरी मातुराम जी दृढ़ आर्यसमाजी एवं सीधे-सादे, पवित्र विचारों वाले थे। सन् 1924 में आपके प्रयत्न से गाँव में अछूतोद्धार आंदोलन प्रारंभ हुआ। अछूतों को यज्ञोपवीत धारण कराया गया, कुओं पर अधिकार दिलाया गया और सामाजिक समरसता को बढ़ावा दिया।
🚩 हैदराबाद सत्याग्रह में सहभागिता
हैदराबाद में निजामशाही अत्याचारों के विरुद्ध जब सत्याग्रह का बिगुल बजा, तो आपने अपने गाँव में सबसे पहले नाम लिखवाया। अपने नेतृत्व में गाँव से जत्था तैयार किया और महाशय कृष्ण जी के साथ औरंगाबाद पहुंचकर सत्याग्रह में भाग लिया।
⚔ जेल यातनाएँ एवं बलिदान
जेल में क्रूरता और अमानवीयता के कारण आपकी तबीयत बिगड़ गई। स्थिति गंभीर होने पर भी आप बाहर आना नहीं चाहते थे, जेल में ही रहकर आंदोलन का भाग बने रहना चाहते थे। परंतु स्वास्थ्य अत्यंत खराब देख जेल प्रशासन ने आपको जबरन जेल से बाहर कर दिया।मनमाड पहुँचते ही, 28 जुलाई 1939 को 50 वर्ष की आयु में आपका शरीर पूरा हो गया। आपने धर्म एवं राष्ट्र के लिए अपने प्राणों की आहुति दी।
🌹 श्रद्धांजलि
चौधरी मातुराम जी का जीवन त्याग, सेवा और सामाजिक समरसता का प्रेरक प्रतीक है। उनका योगदान आर्य समाज और भारतवर्ष में सदा अमर रहेगा।










