देश से भगा दे
देश से भगा दे,
यह जो देश में तबाई है,
मांग रही दे दे यही,
राखी की बंधाई है।
पाप को विस्मार करना,
धर्म का प्रचार करना,
तन पर बिप्त सह कर,
सदा देश का सुधार करना,
आर्यों की मुख्य रिति,
ऋषियों ने बताई है,
इसको तू अपनाले,
यही राखी की बंधाई है।।1।।
शूर वीर है तू,
मत कायरों के काम करिये,
संध्या और हवन भाई,
सुबह और शाम करिये,
सत्यता में नाम करिये,
इसमें तेरी भलाई है,
वैदिक नाद गुंजा दे,
यही राखी की बंधाई है।।2।।
चोरी जारी कृतघ्नता के
मतना जाइये पासभाई,
देश के धर्म में लाइये
जिन्दगी के श्वास भाई,
शराब और मांसादि जितनी भी बुराई है,
इनको कर दे नष्ट,
यही राखी की बंधाई है।।3।।
थियेटर और सनिमा कभी
स्वांग में न जाइये भाई,
सुनने को प्रचार शोभाराम को बुलाइये भाई,
सत्संगों में जाइये भाई,
रोगी की दवाई है,
वैदिक पुस्तक लादे,
यही राखी की बंधाई है।।4।।










