तुम अपनी कहानी

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तुम अपनी कहानी

तुम अपनी कहानी,
भूलो न महिलाओ,
चौदह साल पिया के संग,
पूरा बनवास किया था।
अपमान का बदला लिया,
दुष्ट रावण का नाश किया था,
वह लंका जलानी भूलो ना महिलाओ।।1।।

मंडन मिश्र और शंकराचार्य में
शास्त्रार्थ की ठनी थी,
उभय भारती कुशल
निर्णायक ही मध्यस्थ बनी थी,
थे वेद जुबानी भूलो न महिलाओ।।2।।

समय-समय पर गड्ढे में,
गिरने से देश बचाया,
मूखों को भी पढ़ा-पढ़ाकर
तुमने विद्वान बनाया,
वह शिक्षा दिलानी,
भूलो न महिलाओ ।।3।।

गणित में सारी दुनिया को
कभी था चैलेंज तुम्हारा,
लीलावती के दोहे पढ़कर
चकित आज जग सारा,
है अमिट निशानी,
भूलो न महिलाओ।।4।

यशवन्त सिंह रणभूमि से
जब भाग के घर आया था,
महामाया ने जोश दिलाकर
वापिस दौड़ाया था,
वह बिजली दौड़ानी,
भूलो न महिलाओ ।।5।।

देश धर्म पर शीश कटा गई,
तुम हो रानी हाड़ी,
कट गय आधा अंग जंग से,
इंच न हटी पिछाड़ी, तुम दुर्गा भवानी,
भूलो ना महिलाओ।।6।।

सत्तावन में कौन बनी,
गोरों का काल सुनी हो,
लाल कमर से बांध,
लड़ी होकर विकराल सुनी हो,
तुम झांसी की रानी,
भूलो न महिलाओ ।।7।।

चरित्र सभ्यता गुण,
गौरव को गवां दिया फैशन में,
शोभाराम नहीं चमक चेहरों पे
चाम रंगे रोगन में, वह चाल पुरानी,
भूलो न महिलाओ।।8।।