देश का सुधार सखी

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देश का सुधार सखी

देश का सुधार सखी,
होवे किस प्रकार सखी,
कौन लगावे पार सखी,
इस भारत की नैया को।
वेद कथा में तीन या चार,
सनिमाओं में कई हजार,
जा रहे बेशुम्मार देखने
सांगी भांग नचैया को।।1।।

भले आदमी दुःखी महान,
मजे करें गुंडे शैतान
पाखंडियों का मान,
कोई नहीं पूछे वेद पढैया को ।।2।।

दया धर्म भक्ति इन्साफ,
छोड़के दुनिया कर रही पाप,
डुबा रहे हैं नाव आप फिर,
दे रहे दोष खिवैया को।।3।।

शोभाराम प्रेमी के गान,
का नहीं आज किसी को ध्यान,
मान रहा इन्सान आज,
ईश्वर की जगह रुपैया को।।4।।