बिन विद्या के आज जगत में करडाई का फेरा है
बिन विद्या के आज जगत में
करडाई का फेरा है
वेद सभ्यता सदाचार चार
बिन चारों और अंधेरा है।। टेक ।।
कली-तीन हिस्से पानी दुनियां में
फिर भी है जल का टोटा
पहलवान ब्रह्मचारी बहुत हैं
फिर भी है बल का टोटा
कालिज और स्कूल बहुत है
फिर भी है अक्कल का टोटा
फल दायक है पेड़ बहुत से
फिर भी है फल का टोटा
भानू उदय हो जाने पर भी,
होता नहीं सवेरा है
वेद सभ्यता सदाचार विन,
चारों ओर अंधेरा है।।1।।
कली-बादशाह ले गये सभ्यता,
चर्चिल सारा धन ले गया
अमरीका सब सोना ले गया,
रेली ब्रादर अन्न ले गया
बल बुद्धि और सदाचार को,
ये तामसी भोजन ले गया
रहे सहे की जड़ को फाड़ कर
वेढंगा फैशन ले गया
बहदुरी की जगह पड़ा हुआ,
कायरता का डेरा है
वेद सभ्यता सदाचार बिन
चारों और अंधेरा है।।2।।
कली- शिक्षा बिना शिक्षणालय है,
न्याय से खाली न्यायाला
बिन विद्या विद्या मंदिर,
हडवार बनी भोजन शाला
ऋतु-ऋतु वदल गई हैं,
मनुष्य मनुष्यता तज चालन
कला कौशल की जगह तो विल्कुल,
कर बैठे गड़ बड़ झाला
ईश्वर भक्ति भूल गये,
बेकार का कहें बखेरा है
वेद सभ्यता सदाचार बिन,
चारों और अंधेरा है।।3।।
कली-साधू-साधू नहीं रहे हैं,
गृहस्थी गृहस्थी धर्म भूले
शासक प्रजा चक्कर में हैं,
दोनों सत्य कर्म भूले
चारो वर्ण नियम भूले,
अबोध चारों आश्रम भूले
शोभाराम कुछ लोग स्वार्थी,
अपनी लाज शर्म भूले
आगे चले तो कुआं है
और पीछे हटें तो झेरा है
वेद सभ्यता सदाचार बिन
चारों ओर अंधेरा है।।4।।










