खाने पीने और सोने में मत जीवन बेकार करो

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खाने पीने और सोने में मत जीवन बेकार करो

खाने पीने और सोने में
मत जीवन बेकार करो
जीवन सुफल बनाना है
तो ग्रामों का उद्धार करो

कली-चलने फिरने में हो
सुविधा साफ रास्ते करवा दो
ऊंची जगह से उठवाकर
गड्डों में मिटटी भरवा दो
गलियों में खड़जे ठुकवादो
सब बिगड़े कुएं सुधरवादो
जहरीले कीड़े मच्छरों को
डलवा के दवाई मरवा दो
गन्दगी कूड़ा करकट सब,
उठवा के गांव से बाहर करो ।।1।।

कली-पशुओं के चरागाह छोड़-छोड़
कर खेतों की करो चकवन्दी
पैदावार बढ़े खेतों की
घर-घर हो आखानन्दी
कोई न अपने दिल पर
लाये कभी भावनाये गन्दी
लड़ाई झगड़े छोड़-छोड़
सब आपस में करो सन्धी
पाप कपट छल दम्भ द्वेष तज,
आपस में सब प्यार करो ।।2।।

कली-अपनी सन्तान पढ़ाने को,
तुम ग्राम-ग्राम स्कूल करो
अब तक काफी भूल हुई है
अब आगे मत भूल करो
पंचायतों में न्याय करो
सब काम धर्म अनुकूल करो
अपनी कष्ट कमाई को
तुम कभी ना खर्च फिजूल करो
सन्ध्या हवन सब सुबह शाम में,
मिलकर के नरनार करो।।3।।

कली-हर एक गांव के अन्दर
आज पंचायती घर होना चाहिये
पंचायती घर में रेडियो नित
सुनने को खबर होना चाहिये
रोशनी का इन्तजाम ग्राम में
इधर-उधर होना चाहिये
खेल कबड्डी कुश्ती का
मैदान जबर होना चाहिये
शोभाराम प्रेमी मण्डली
लेकर तुम भी प्रचार करो।।4।।