आजादी के मिलने पर भी आजादी का पता नहीं

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आजादी के मिलने पर भी आजादी का पता नहीं

आजादी के मिलने पर भी
आजादी का पता नहीं
अपना सारा दोष है इसमें
ओर किसी की खता नहीं।। टेक ।।

कली-कहने वाले बहुत फिरै,
कुछ करने वाले नहीं रहे
ईश्वर धर्म राज्य सत्ता से
डरने वाले नहीं रहे
देश की भक्ति के सत पथ पर,
मरने वाले नहीं रहे
स्वयं कष्ट सह कष्ट ओर का,
हरने वाले नहीं रहै
आप जिये औरो को मारकर,
आर्यों की सभ्यता नहीं।।1।।

कली- स्वार्थ में सब अन्धे हो रहे
अपना कर्तव्य याद नहीं
इसी लिये आजाद हुये भी,
कह रहे हम आजाद नहीं
आजादी का सच्चा सुख,
तुम्हे होने दे प्रमाद नहीं
ऋषियों की वाणी भूल गये,
क्या तुम उनकी औलाद नहीं
एसी बात नहीं छोड़ी जो
ऋषि गये तुम्हे बता नहीं।।2।।

कली-ऋषियों के जगाये नहीं जगे जो,
उन्हें जगाने आये कौन
आगे पढ़े और पीछे भूल जां,
उन्हें पढ़ाने आये कौन
अंधों के आगे रो करके,
आंख फुड़ाने आये कौन
जो भी आया वहीं खपाया,
जान खपाने आये कौन
जिसकी जड़ में आग लगी,
लहरायेगी वह लता नहीं।।3।।

कली-एक बात में विनय रूप में
कह रहा जनता सारी को
बाद में बोलो पहले समझो,
अपनी जिम्मेदारी को
कहना कुछ, और करना कुछ,
अब छोड़ो इस मक्करी को
शोभाराम प्रेमी कह दो
दुनिया के हर नर नारी को
आज तलक किसीने भी
सुख पाया किसी को सता नहीं।।4।।