सर्वाधार निहारो हालत भारत देश हमारे की बीच
सर्वाधार निहारो हालत
भारत देश हमारे की बीच
धार में नाव फंसी देखें
बाट किनारे की।।टेक ।।
बिन खिवैया हमारी
नैया बीच धार में चकरारी
बड़े-बड़े तुफानों के
संग मुद्दत से टक्कर खारी
ढंग देख बेढंग सह
आतंक रही जनता सारी
करो ध्यान भगवान आज
सकंट जान फंसी म्हारी
अगन गगन जल धरन
पवन हालत बेढंगी सारे की ।।1।।
आज किसी का किसी के
ऊपर नहीं रहा विश्वास यहां
भले मनुष्यों के बाने में
फिरे बहुत बदमाश यहां
जगह-जगह गुन्डा गर्दी की
खुलती जा रही क्लास यहां
सादे भोले लोग रात दिन
सह रहे भारी त्रास यहां
ना कहता ना कोई सुनता
बात धर्म के बारे की।।2।।
सात्विक भोजन के बदले में
यहां तामसिक भोजन रह गया
दिन चर्या गये भूल स्वास्थ्य के
बदले में फैशन रह गया
वेद की विद्या नहीं रही
तो शेष यहां क्या फन रह गया
नाम मात्र को तन रह गया
दोषों से भरा हुआ मन रह गया
हो रही यहाँ कायम मिसाल
बेशर्मी तेरे सहारे की।।3।।
सारी दुनियां कहती की ईश्वर न्यायकारी है
जब तुम न्याय करो न्यायकारी,
यह क्यों दशा हमारी है
दुखी हुई दिन रात यहां
चिल्ला रही जनता सारी है
बड़ा भयंकर वक्त देश पर
इससे बचना भारी है
बिना तुम्हारे कौन सुनें
इस शोभाराम दुखियारे की।।4।।










