भाइयो आज तुम्हारे यह इम्तिहान की घड़ी
भाइयो आज तुम्हारे यह इम्तिहान की घड़ी
देश धर्म जाति के लिए बलिदान की घड़ी
लाखों वीर जिस आजादी की भेंट कर दिये
कुएं जोहड़ खाई खन्दक लाशों से भर दिये
धन मांगा तो धन भी दिया सर मांगा सर दिया
उस आजादी पै दुश्मन ने दांत धर दिये
आज मित्र और शत्रु की पहचान की घड़ी ।।1।।
गोरे काले छोटे बड़े सब एक परिवार है
व्यापारी मजदूर कृषक का एक घरबार है
सुख दुःख सबका एक, एक ही जीत हार है
हम सब पर जननी माता का एक प्यार है
भेदभाव भुलाकर यह सम्मान की घड़ी ।।2।।
कारखानों में मजदूरों उत्पादन आज बढ़ा दो
किसानों तुम अपने खेतों में दुगना नाज बढ़ा दो
अस्त्र शस्त्र आधुनिक लड़ने वाले जहाज बढ़ा दो
सारे भूमंडल पर अब आर्य साम्राज्य बढ़ा दो
अंतिम चीन अमरीका पाकिस्तान की घड़ी।।3।।
स्वावलम्बी बन जाओ आज सब सहारा छोड़ दो
गिद्ध की दृष्टि जो देखें वे आंखें फोड़ दो
रंगे हुए स्यारों से आज सब सम्बन्ध तोड़ दो
दुनिया के धोखेबाजों का भांडा फोड़ दो
आज प्रेमी जोशीले व्याख्यान की घड़ी।।4।।










