शिरोमणि जो देश कभी था सारे भूमंडल में।
शिरोमणि जो देश कभी
था सारे भूमंडल में।
आज देख लो इस भारत की
नाव धसी दलदल में।।
इस दलदल में देश की
नैया पापी जयचन्द धंसा गया
आज तलक भी निकल सके न
ऐसे जाल में फंसा गया
ऊट मटिल्ला अपना करके
कुल दुनिया को हंसा गया
हंसो के स्थान के ऊपर
गिद्ध और कौवे बसा गया
जिनके बराबर नहीं था
कोई बल में और अक्ल में
आज देख लो इस भारत की
नाव फंसी दलदल में।।1।।
आपस में लड़-लड़कर के ही
अपने घर बरबाद किये
आप तो स्वयं गुलाम बने
और गैरों को आजाद किये
घर में आग लगाकर अपने
खुश होकर शंखनाद किये
सर्वस्व नाश हुआ तुम
फिर भी बैठे रहे प्रमाद किये
इसी का कारण खून बहा
लाहौर और पलवल में
आज देख लो इस भारत की
नाव धंसी दलदल में।।2।।
जिस जगह हवन नित होता था
सिगरेटों की धुआंधार वहां
थी कथा वेदशास्त्रों की जहां
अब नाच रहे मक्कार वहां
जिस जगह त्याग तप श्रद्धा थी
है आज लोभ अहंकार वहां
जिस जगह प्रेम था सदाचार से
आज है भ्रष्टाचार वहां
विश्व गुरु कहकर जिसके
जयमाल पड़ी थी गल में
आज देख लो उस भारत की
नाव धंसी दलदल में ।।3।।
नाव धंसी दलदल में मुसाफिर
आर फिरैं कुछ पार फिरें
किसान कहीं मजदूर कहीं
व्यापारी कहीं बेकार फिरें
शोभाराम बिन वेद धर्म के
दुख भरते नर-नार फिरैं
वेदमार्ग अपना लो तुम्हें जो
बचना इस हलचल में
आज देख लो इस भारत की
नाव धंसी दलदल में।।4।।










