जागो ऐ नौजवानो
जागो ऐ नौजवानो, अब हो गया सवेरा रे
अब हो गया सवेरा आलस ने तुमको घेरा॥टेक॥
सूरज उदय हो आया अन्धकार सब भगाया
बदली समय ने काया, दुनिया ने पलटा खाया
घर में तुम्हारे छाया अज्ञान का अंधेरा रे।।1।।
आलस ने तुमको घेरा…
आपस में लड़-झगड़कर तुम सो गये हो पड़कर
घर में तुम्हारे बड़कर सुख सम्पदा को हड़कर
सब साथ ले चला है कहीं दूर का लुटेरा रे।।2।।
आलस ने तुमको घेरा…
प्रमाद अब तो छोड़ो दुनिया के साथ दौड़ो
स्वार्थ का जाल तोड़ो शत्रु के मुंह को फोड़ो
जो घात में तुम्हारी बैठे हुए चौफेरा रे ।।3।।
आलस ने तुमको घेरा…
वीरो यह नौजवानी दुनिया में रहे सदानी
इस जगत में निशानी रह जाये एक कहानी
हो शोभाराम प्रेमी एक रोज केंच डेरा रे
आलस ने तुमको घेरा, अब हो गया सवेरा।।4।।










