रट ओम नाम नित्य सुबह शाम प्राणी

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रट ओम नाम नित्य सुबह शाम प्राणी

रट ओम नाम नित्य सुबह शाम प्राणी
तेरी दो दिन की है जग में जिन्दगानी
प्रकृति देवी का लुटेरा
जीवन धन पर दे रहा फेरा
तेरा ध्यान कहां कर होश अज्ञानी,
तेरी दो..।।1।।

पांच कर्मों का हाल जानकर
तीन गुणों की चाल जानकर
काल जानकर कर कुछ अभिमानी,
तेरी दो…।।2।।

उत्तम मानव चौला पाकर
लाभ ना उठाया कुछ लक्ष भुलाकर
मिलाकर मिट्टी में क्यों कर रहा नादानी ,
तेरी दो…।।3।।

जिसको कहता मेरा मेरा
शोभाराम यहां कुछ नहीं तेरा
डेरा कूंच हो एक दिन दुनिया है फानी,
तेरी दो…।।4।।