एक दिन बना है मुसीबत का साया।
एक दिन बना है मुसीबत का साया।
श्रीराम ने मुझको समझा पराया ॥
भरत जो अब तक ना याद आया॥ टेक ॥
मैं हूं अभागा जो संग जा सका ना।
रघुकुल तिलक की शरण पा सका ना॥
बिछड़ने पै अब तक भी दर्शन ना पाया।
श्रीराम ने मुझकों समझा पराया ॥1॥
भरत जो-
है धन्य लक्ष्मण बड़ा भाग्यशाली।
गया साथ में जिसने जंगल की राहली ॥
पर ये भरत तो गमों ने सताया।
श्रीराम ने मुझको समझा पराया ॥2॥
भरत जो-
अगर कल तलक राम लौटे ना बन से।
मिलन हो सकेगा ना राजीव नयन से॥
जल जायेगी चिता में ये काया।
श्रीराम ने मुझको समझा पराया ॥3॥
भरत जो-
बतादे कोई राम आये कहां तक।
बिछवादूं फूलों को राहों में वहां तक॥
अभी कोई कर्मठ सन्देशा ना लाया।
श्रीराम ने मुझको समझा पराया ॥4॥
भरत जो-










