आज नहीं कल इस धरती पर आर्यों का युग आयेगा।
आज नहीं कल इस धरती पर
आर्यों का युग आयेगा।
मनुशास्त्र और वेद की
बातों को ये जग अपनायेगा॥ टेक ॥
सदा-सदा ही आदि सृष्टि से
युग परिवर्तन होता है।
असुर बढ़ें कभी देवों का भी
उत्साहवर्धन होता है॥
किसी महापुरुष के आने से
छल कपट का खण्डन होता है।
आध्यात्मिक चिन्तन बढ़ता है
सच का अभिन्दन होता है।
खण्ड-खण्ड पाखण्ड दुर्ग हो
जब सच से टकरायेगा ॥1॥
बौद्ध जैनियों ने भी नास्तिकता की
जड़े जमाई थीं।
द्राविड़ देशोत्पन्न ब्राह्मण ने
तर्क से नींव हिलाई थीं।
आदि शंकराचार्य की
हर युक्ति में सच्चाई थीं।
पाषाण मूर्ति मन्दिरों की
सब धरती में गड़वाई थीं॥
किसे खबर थी सत्य
सनातन वैदिक ध्वज लहरायेगा ॥2॥
कभी सभ्यता संस्कृति का
यवनों ने भी नाश किया।
जला दिया साहित्य देश
सदियों तक अपना दास किया ॥
प्रताप शिवा गुरु गोविन्दसिंह ने
गुलामी का एहसास किया।
आजादी की साथ जोड़
बलिदानों का इतिहास दिया ॥
वीर वैरागी बन्दे का लहू
किसे नहीं तड़फायेगा॥3॥
उन्निसवीं सदी में ऋषि दयानन्द
अकेला ही जल्मों से लड़ा।
संन्यासी पाखण्ड खण्डनी
लेकर के हो गया खड़ा॥
झूठे पन्थ हिले मजहब पर
मानों कोई वज्र पड़ा।
वेद की सच्चाई के आगे
झूठ नहीं रह सका खड़ा॥
समझ गये थे ये संन्यासी
पाखण्ड को भस्म बनायेगा ॥4॥
फूट अविद्या स्वार्थ के पद से
आर्यों मुख अपना मोड़ो।
लेखराम श्रद्धानन्द के
बलिदान त्याग को मत छोड़ो ॥
आलस और प्रसाद को तज
संगठन से ही नाता जोड़ो।
वैदिक वर्ण व्यवस्था हो
सब जन्म जाति बन्धन तोड़ो॥
एक परिवार बनाने से कर्मठ
बल बढ़ता जायेगा ॥5॥










