मिलने आया है माता से मिलने आया है
मिलने आया है माता से
मिलने आया है,
यह जानने मेरा लाल,
कैसा मेरी माँ का हाल।
ये मां को भूल ना पाया है ॥
मिलने आया है
कितनी दूर से मिलने आया,
साथ में साथियों को भी लाया।
नर-नारी की भीड़ उमड़ रही,
जाने कोई बारात है चढ़ रही॥
बहन से टीका तो लगवा ले,
हाथ में राखी तो बँधवाले।
देख तो पागल सी हो लखाए,
कौन इसे डोली में बिठाए॥
एक बार तू बोल तो मुखसे,
मां कुछ कहना चाहती है तुझसे
जब तू घर में कदम रखता था,
मां-मां कहता नहीं थकता था।
बोलता था जैसे तू पहले,
एक बार अब भी मां कहले ॥
मां बोले तू बोलता क्यों नहीं,
अपनी जुबां को खोलता क्यों नहीं।
छुट्टी में घर रहके गया था,
क्या हुआ उसका जो कहके गया था।।
शादी का जब जिक्र किया था,
चलते मां को वचन दिया था।
हंसकर कहा मां अब जाने दे,
लौट के वापिस घर आने दे॥
आते ही शादी मां करूंगा,
पूरे तेरे अरमां करूंगा।
रही अधूरी इच्छा मेरी,
देख सकी नहीं दुल्हन तेरी
बचपन के दिन याद हैं तेरे,
जब तू गले लगता था मेरे।
कुछ दिन में ही विदा हो लूंगी,
जीते जी कैसे भूलूंगी।
बेशक छोड़ चला तू मुझको,
फक्र जन्म दे करके तुझको ।
मेरा दूध सफल किया बेटा,
देश पै जां दे चल दिया बेटा।
कर्मठ मां का ना जख्म भरेगा,
वतन तेरा तुझे याद करेगा।










