गुजरी तमाम उम्र लुटा तब पता चला

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गुजरी तमाम उम्र लुटा तब पता चला
मंजिल से भटकने का तब पता चला ॥

आने को तो तू आ गया रव के जहान में
खुद को ना समझा ना मुझे रब का पता चला ॥

बचपन जवानी गुजरी खिली मौज मस्तियाँ
मौजों में मस्तियाँ जो डूबी तब पता चला ॥

किया रुख ना किनारे की तरफ अपनी कश्ती का
जब डूबने लगी भँवर में तब पता चला ॥

तन के ख्याल में तो सदा तनकर ही तू चला
हुस्न और जवानी ढल गई तब पता चला ॥

धर्म अर्थ काम मोक्ष हित तुझको जन्म मिला
शुभ कर्म किए आजमाना तव पता चला ॥

अब भी तू जाग ऐ ‘ललित’ हालाँकि हुई देर
माना कि तब पता न था, क्या अब पता चला ?

(रव) ईश्वर (हुस्न) सौन्दर्य, सुन्दरता