आर्य गर हो तो आर्य समाज में तुम आया करो
तर्ज : रेत पर लिख के मेरा नाम मिटाया ना करो
आर्य गर हो तो आर्य समाज में तुम आया करो
संग सत्संग में औरों को भी तुम लाया करो ॥ संग सत्संग…
रूठ बैठे जो तेरे भाई-भाई से अलग
उनको तुम प्रेम की भाषा में समझाया करो ॥ संग सत्संग…
बेखबर चलते हैं जो वेदों की राहों से अलग
उनको वेदों की सही राह भी दिखाया करो ॥ संग सत्संग…
जाति मजहब की खातिर जो बँटे हिस्सो में
तुम दयानन्द के उपदेशों से समझाया करो ॥ संग सत्संग…
अपनी उन्नति में न केवल खुश रहना आर्यो
दूसरों की उन्नति में शामिल हो जाया करो ॥ संग सत्संग…
दर्द जो सहते हो खुद के तो बड़ी बात नहीं
दर्द गर हो पराया तुम उसे अपनाया करो ॥ संग सत्संग…
करके दिखला दो निष्काम कर्म दुनिया को
त्याग सेवा की लगन सब में जगाया करो ॥ संग सत्संग…
जो जहालत की दीवार गिरी फिर वो खड़ी
तुम दयानन्द की मेहनत को न जूँ जाया करो ॥ संग सत्संग…










