आज चमन में फूलों की

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आज चमन में फूलों की

आज चमन में फूलों की
बिखरी पंखड़ियाँ देखो तो।
उत्थान के ख्वाबों में अपने ही
पतन की घडियाँ देखो ॥ टेक ॥
स्वतंत्रता के दर्पण में झांको
तो जरा अपना मुखड़ा।


निर्लज्जता हंसती लाज
किसे रोकर के सुनायेगी दुखड़ा॥
आंखों से सुहागन की बरसे
सावन की ये झड़ियां देखो तो॥1॥

उम्मीद के सूरज ने कुटिया को
अन्धेरे कारे-कारे दिये।
आशा की किरन के बदले यहां
हर रात ने टूटे तारे दिये ॥
पटरी पर चन्द्रबदन सोये
उजड़ी झौपड़ियां देखो तो ॥2॥

पाषाण के टुकड़े तराशे हुए
तो मन्दिर के भगवान बने।
पाषाण को भोग लगाने वाले
चेतन से अन्जान बने॥
रोहित की चिता के लिए तारा
चुगती है लकड़ियां देखो तो ॥3॥

बदनाम नकाबी चेहरों ने
कुछ लोकतन्त्र की हत्या की।
खाल उतारके ओढ़ली ऊपर
डोर संभाली सत्ता की॥
लहू चूस रहे नर कंकालों की
भूखी अंतरियाँ देखो तो ॥4॥

चाँदी ने कलम भी खरीदली है
बुद्धिजीवी की है बंद जबां।
इतिहास मगर नहीं बख्शेगा
दामन के ये धब्बे लाख छिपा॥
‘कर्मठ’ दुल्हन के सेहरे की
टूटी हुई लड़ियां देखो तो॥5॥
आज चमन में फूलों की…