मुझको आज महान् बना दो।
मुझको आज महान् बना दो।
मैं नभ से जाकर टकराऊं,
बल पौरुष से जग थर्राऊं।
कोटि-कोटि कण्ठों में गूंजूं,
मुझको कवि का गान बना दो ।। १ ।।
आतंकित होवे दुःशासन,
कीचक का मैं प्राणान्तक बन।
पद सुता की लाज बचा लूं,
मुझको भीम बलवान् बना दो।।२।।
नहीं विश्व का राज चाहिए,
नहीं स्वर्ग का ताज चाहिए।
र्बल शोषित और विताड़ित,
मानव का अरमान बना दो ।। ३ ।।










