यज्ञोपवीत लेकर खुद को निहारना है।

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यज्ञोपवीत लेकर खुद को निहारना है।

यज्ञोपवीत लेकर खुद को निहारना है।
जीवन सुधारने का संकल्प धारना है ॥
जीवन………

हर झूठ की तरफ से मुँह अपना फेरना है।
सच्चे व्रतों का पालन करने की प्रेरणा है।
तप त्याग साधना को हरदम उभारना है।॥
जीवन……..

गायत्री जाप सन्ध्या स्वाध्याय यज्ञ करना।
दुष्टों की संगति में हरगिज न पाँव धरना।
भगवान् को कभी न दिल से बिसारना है।
जीवन…….

समझो ये तीन ऋण हैं कन्धे पे तीन धागे।
जब तक हैं प्राण इन से व्यक्ति कभी न भागे।
माता पिता गुरु के ऋण को उतारना है ॥
जीवन………

पितरों की टहल सेवा देवों की उचित पूजा।
ऋषियों के संग जैसा कर्त्तव्य है न दूजा।
निष्कपट स्वच्छ सुन्दर जीवन गुज़ारना है।
जीवन…….

नेकी के काम करके फल की न चाह लाना।
निष्काम भाव होकर औरों के काम आना।
शिक्षा का सूत्र है यह मन में विचारना है।
जीवन………

शुभ चिह्न आर्यों का यज्ञोपवीत है यह।
सब श्रेष्ठ लोग पहनें ऋषियों की रीत है यह।
दुनियाँ में ‘पथिक’ इस के यश को निखारना है।
जीवन……….