मधुर ओम् का जप किये जा किये जा।
मधुर ओम् का जप किये जा किये जा।
तू आधार उसका लिये जा लिये जा ॥
सदा अन्न भूखों को नंगों को कपड़ा।
जहाँ तक बने तू दिये जा दिये जा ॥
घृणा द्वेष अभिमान से मानवों के।
हृदय फट रहे तू सिये जा सिये जा ॥
धरा धाम धन जायँगे कुछ न सँग में।
तू धन धर्म सँग में लिये जा लिये जा ॥
सरस संयमी स्वस्थ स्वाधीन बनकर ।
तू सौ वर्ष जग में जिये जा जिये जा ॥
‘प्रकाश आर्य’ चढ़के कभी जो न उतरे।
वही प्रेम प्याला पिये जा पिये जा ॥










