तुम बसो प्रभु मेरे मन पाऊँ मैं तेरी शरण दे दो अमृत दान

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तुम बसो प्रभु मेरे मन पाऊँ मैं तेरी शरण दे दो अमृत दान

तर्ज : ऐ मेरे प्यारे वतन से मेरे बिछड़े चमन

तुम बसो प्रभु मेरे मन पाऊँ मैं तेरी शरण दे दो अमृत दान
तू ही सच्चिदानन्द स्वरूप तूही प्रभुज्योति स्वरूप मन में तेरा ध्यान ॥

सूर्य चन्द्र सितारों का प्रभु कैसा अनुपम दीना दान
धरती रनों से सजाई और सजाया आसमान
ये नजर देखे कहाँ तक मन करे कितनी उड़ान मन में तेरा ध्यान !!

सूर्य चन्द्र सितारों का प्रभु कैसा अनुपम दीना दान
धरती रत्नों से सजाई और सजाया आसमान
ये नज़र देखे कहाँ तक मन करे कितनी उड़ान मन में तेरा ध्यान ॥

तेरे पावन ओ३म् नाम में हैं बसे चारों ही धाम
तेरी महिमा गा रहे हैं नारी नर सब सुबह शाम
सर्वगुण सम्पन्न तू प्रभु तू है सर्वशक्तिमान्, मन में तेरा ध्यान ॥

जो निरन्तर ध्यान करते उनको देता तू प्रकाश
साधकों के शुद्ध हृदय कर तू करे पापों को नाश
है सदा तुझको प्रभु हर भक्त की पूरी पहचान, मन में तेरा ध्यान ॥

तेरी भक्ति प्यासे भक्तों के लिए है जल समान
तू बुझाए प्यास भक्तों का करे जीवन कल्याण
तेरे दर्शन को प्रभु जाए तड़प भक्तों के प्राण, मन में तेरा ध्यान ॥

गोद में अपनी बिठा प्रभु प्यार दे माता समान
और कभी बनके पिता तू ही कराता अमृतपान
पाते सुख आनन्द तुझसे भक्त पाते मोक्ष धाम, मन में तेरा ध्यान ॥