ओ३म् जपने में लगा चित्त है

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ओ३म् जपने में लगा चित्त है

तर्ज: चाँद मध्यम है आसमाँ चुप है

ओ३म् जपने में लगा चित्त है
ओ३म के जाप में बड़ा हित है ॥

ओ३म् है शुद्ध स्वरूप रहता शाश्वत
ओ३म् गुरु-मंत्र और दुःख नाशक
ओम् है कर्ता और विधाता है
उसका सिमरन नियम से करते हैं ॥ ओ३म् जपने में……

सच्चिदानन्द स्वरूप निराकार
उस अनुपम से प्यार करते हैं
सृष्टिकर्ता है ओ३म् सर्वाधार
उसकी करुणा का पात्र बनते हैं ॥ ओउम जपने में……

ओ३म् की शरण में ‘ललित’ आजा
जिन्दगी फिर तेरी रहे ना रहे
सार्थक जिन्दगी को करना है
करले चिन्तन कि खुद की सुध न रहे ॥ ओ३म् जपने में…