तू जग का आसरा सब का तू ओ३म् प्यारा है

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तू जग का आसरा सब का तू ओ३म् प्यारा है

तर्ज: न आसमां ना सितारे फरेब देते हैं

तू जग का आसरा सब का तू ओ३म् प्यारा है
तू ही पिता तू ही बन्धु सखा हमारा है ॥

तलाश क्यूँ करूँ मरुस्थल पहाड़ या बन में
इधर उधर क्यूँ मैं भटकूँ जो पाऊँ निज मन में
जो आँख मूँद लूँ घट में तेरा नजारा है ॥ तू ही पिता….

प्रकाशमय है तू तुझसे प्रकाश पाते हैं,
तू आत्मज्ञान का है दाता ये वेद गाते हैं,
जो भक्त आए शरण तेरी उनको तारा है ॥ तू ही पिता….

मैं चल पड़ा हूँ प्रभु वेद मार्ग पर तेरे,
प्रबल विचार हों प्रभु यज्ञमय सदा मेरे,
न हूँ निराश पता जब कि तू सहारा है ॥ तू ही पिता….

तुझे विसार नहीं चाहूँ मैं जन्म खोना,
न पाई तेरी शरण अन्तकाल है रोना,
मैं जानूँ जन्म ये मिलता नहीं दुबारा है ॥ तू ही पिता…