बच्चे बूढ़े नर नार सभी स्वाध्याय करो

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भजन – १२१

बच्चे बूढ़े नर नार सभी
स्वाध्याय करो स्वाध्याय करो।
आदर्श बनें परिवार सभी
स्वाध्याय करो स्वाध्याय करो ।

स्वाध्याय में ऐसी मस्ती है।
अनमोल बड़ी पर सस्ती है।
पाओगे प्रभु का प्यार सभी
स्वाध्याय करो…..

चाहे देश विदेश का अन्तर हो।
‘वेदों का पाठ निरन्तर हो।
पढ़ने के हैं हकदार सभी
स्वाध्याय करो’….

सद्ग्रन्थों की जो रंगत है।
ऋषियों मुनियों की संगत है।
हो जाओगे भव पार सभी
स्वाध्याय करो…..

बचपन यौवन या बुढ़ापा हो।
कोई रोग बदन में व्यापा हो।
ऋषि वचन करो स्वीकार सभी
स्वाध्याय करो…..

श्रुति सम्मत है व्यवसाय यही।
दुःख से बचने का उपाय यही।
सपने होंगे साकार सभी
स्वाध्याय करो…..

सत् शास्त्र मिलें जो पढ़ने को।
संकेत हो पथ पर बढ़ने को।
रहो ‘पथिक’ सदा तैयार
सभी स्वाध्याय करो।