भैया मोहे ला दो चुनरी रंगदार।
भैया मोहे ला दो चुनरी रंगदार।
ओ३म् नाम का वृक्ष और
गायत्री डाली-डाली हो।
‘सत्य नाम के पुष्प खिलें’,
और वेद शास्त्र हरियाली हो
भक्ति भाव का निर्मल धागा,
सत्संग रंग में डार । भैया….
ब्रह्म नाम के फल हो सुन्दर,
चुनरी के हर कोने में,
ओ३म् नाम लिखवा दो उन पर
छुट न जाये धोने में।
उपनिषदों के बेल और बूटे
दर्शन की हो किनार। भैया…
गंगा यमुना और नर्मदा,
नगरी मथुरा काशी हो,
पातञ्जलि जैमिनी महर्षि,
दयानन्द संन्यासी हो।
कणाद व्यास और गौतम
जैसे होवें दर्शनकार। भैया…
ऐसी ही चुनरी रंगवा दो,
जब सब वैभवशाली हों।
सत्यं शिवं सुन्दरम् जिसमें
पड़ी ईश की लाली हो।
विद्याशंकर इस चूनरी पर,
न्यौछावर संसार । भैया…










