वह सब के दिल में रहता है
वह सब के दिल में रहता है
दिल में ही पाओगे।
गर बाहर जाओगे तो
धोखा खाओगे। वह सबके..
‘सृष्टि को बनाता है’
और खुद ही चलाता है।
दुनियाँ का रक्षक है
सब का वह दाता है।
उसकी यह माया है
कण-कण में समाया है।
यह सब अपने दिल को
तुम कब समझाओगे ।
वह सब के दिल में रहता है..
तीर्थ पर जाने में
मल-मल के नहाने में।
फल फूल चढ़ाने में
खुद को भटकाने में।
कुछ भी न हाथ लगा
और जीवन बीत गया।
तब तलियाँ मल-मल
के रोते रह जाओगे।
वह सब के दिल में रहता है…
जितने भी प्राणी हैं
सबका मन-मन्दिर है।
ईश्वर हर प्राणी के
मन्दिर के अन्दर है।
इन की जो सेवा है,
फल मीठा मेवा है।
अनजान ‘पथिक’
समझो वरना पछताओगे।
वह सब के दिल में रहता है.










