श्रद्धा के फूलों से ऐ ऋषि यादों को दिल में सजाएँगे

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श्रद्धा के फूलों से ऐ ऋषि यादों को दिल में सजाएँगे

तर्ज: दिल से भुला दो तुम हमें हम ना तुम्हें भुलाएँगे

श्रद्धा के फूलों से ऐ ऋषि यादों को दिल में सजाएँगे
सत्य की बाती से दिपक ज्ञान का मन में जलाएँगे ॥
हम ना तुम्हें भुलाएँगे ॥

नजरों से क्यूँ था गिरा दिया धर्म के ठेकेदारों ने
गिरतों को प्रेम से ऋषि ने अपने गले लगा लिया
सींचे ऋषि ने खूने चमन कैसे भला मुरझाएँगे ॥ सत्य की…

गुरुकुल ऋषि बना गया आदर्श शिक्षा बता गया
विधवा सति गौ अनाथों को अपना हक दिला गया
मन्त्र स्वराज्य का ए ऋषि हर दौर में दोहराएँगे ॥ सत्य की…

ऐसी थी धर्म की लगन जैसी किसी दीवाने की
सत्य की खातिर मिट जाने की मिटते हुए परवानों की
सत्य के उजले प्रकाश को हम घर घर तक फैलाएँगे ॥ सत्य की…

वैदिक धर्म संध्या हवन से मन में बसाया ओ३म् को
दिल में दया अटूट थी, प्यार दिया हर कौम को
घातक को गले लगा लिया हम तुझको गले लगाएँगे ॥ सत्य की…