जब कोई भँवर में छोड दे

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जब कोई भँवर में छोड दे

जब कोई भँवर में छोड दे
चमकता किनारा भी मुख मोड़ दे
तब तुम प्रभु पास जाना अरे,
वो घर खुला है खुला ही
रहेगा तुम्हारे लिये ।

अभी तुमको माना जरुरत नहीं,
वो दिन भी आयेंगे खुद चाहोगे
अभी धूप का एक पर्दा हो तुम,
अन्धेरा भी इसके विरूध पावोगे

जब राहजन कोई डराने लगे
तुम्हे अपना घर ही बनाने लगे
तब तुम प्रभु पास जाना अरे……

हो ईर्ष्या की मन में तरंगें उठी,
किसी की खुशी में खुशी देखकर
बने राख जल भुन के सारा बदन,
किसी की जरा सी हंसी देखकर

खुदी की हसरत रहने लगे
सुरेन्द्र ये दिल भी कहने लगे
तब तुम प्रभु पास जाना….