टंकारा से आया वरदान ना देखा जग ने

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टंकारा से आया वरदान ना देखा जग ने

तर्ज: बदली से निकला है चाँद

टंकारा से आया वरदान ना देखा जग ने

ऋषि दयानन्द सा महान ॥ टंकारा ॥

देश की दशा पे ऋषिवर नैन भर रोए, देख गुमराहों को चैन से न सोए

समझ ना सके ऋषि को लोग थे नादान ॥ टंकारा ॥

छुआछूत ऊँच नीच के भेद मिटाने, आया दयानन्द सबको गले से लगाने

पतितों का दयानन्द ने किया उत्थान ॥ टंकारा ॥

पाखण्डियों ने अपने पंथ थे चलाए, पञ्जों में जकड़े लोग ऋषि ने छुड़ाए

मतवादियों की कर दी नींद हराम ॥ टंकारा ॥

बैठे थे लोग वेदों को भुलाए, फैले थे सदियों से रूढ़ियों के साए

वेदविहीनो को दिया सत्य का ज्ञान ॥ टंकारा ॥

जन गण मन को सही मार्ग दिखाए, दीप जो भी बुझ चुके थे ऋषि ने जलाए

अपने गुरु के पूरे किए अरमान ॥ टंकारा ॥

मृत्यु से डराया विष के प्याले पिलाए, डरके मृत्यु ने अपने प्राण बचाए

दान दया का बाँट के पाया प्रभुधाम ॥ टंकारा ॥