भूले से भी न भूल सकेंगे ऋषि को हम

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भूले से भी न भूल सकेंगे ऋषि को हम

तर्ज: तंग आ चुके हैं कश्मकशे जिन्दगी से हम

भूले से भी न भूल सकेंगे ऋषि को हम

दरियादिली ऋषि की बता दें सभी को हम ॥ भूले से ॥

जो प्यार करना ऋषि ने सिखाया जहान को

अपना बना के प्यार करें हर किसी को हम ॥ भूले से !!

तोड़े ना हम ऋषि की कभी रिश्ताए उम्मीद

वेद प्रचार करें शुरू आज ही से हम ॥ भूले से ॥

वेदों की राह जो न दिखाता ऋषि हमें

कैसे सुनाते हाल अपना बेबसी को हम ॥ भूले से ॥

गुमराहों पर ऐ आर्य निगाहें करम तो कर

गुफलत को क्या मिटा न सकेंगे कभी भी हम ? ॥ भूले से ॥