सितारों से पूछो बहारों से पूछो
दिलों में दयानन्द छाए हुए हैं
शहीदों के खूँ आजमाए हुए हैं ॥
जहालत की घनघोर घटाएँ जो छाईं
मुसीबत जहाँ में फिर मँडराई
जहालत मिटाने को आए हुए हैं ॥ शहीदों के !!
बनेंगे दयानन्द के सच्चे सिपाही
चारों वेदों की जिसने धूम मचाई
हम निष्काम कर्म सिखाए हुए हैं ॥ शहीदों के ॥
‘कृणवन्तो विश्वार्यम्’ करके दिखाएँ
सारे जहाँ को हम स्वर्ग बनाएँ
ये सपना ऋषि का सजाए हुए हैं ॥ शहीदों के !!
ध्वजा ओ३म् की कर में लेके फिरेंगे
ओ३म् नाम से सब के भेद मिटेंगे
ऋषिवर का संदेश लाए हुए हैं ॥ शहीदों के ॥
तरसती हैं तेरे लिए ये निगाहें
तड़पकर निकलती हैं दिलों से सदाएँ
दर्दे दिल की चाहत जगाए हुए हैं ॥ शहीदों के ॥
दयानन्द के भक्तो तुम सो ना जाना
कृपा करके जागो और जग को जगाओ
सत्यार्थ प्रकाश ऋषि से लाए हुए है ॥ शहीदों के ॥










