प्रभु भक्ति में मन लगा लेते ईश चरणों में सर झुका देते
तर्ज: दो घड़ी वो जो पास आ बैठे
प्रभु भक्ति में मन लगा लेते ईश चरणों में सर झुका देते
दर्श प्रभु जी हमें दिखा देते ॥ प्रभु भक्ति ॥
भूल की उम्र भर समय खो के बीज पापों के मन में यूँ वो के
अब ये जाना के क्या गँवा बैठे ॥ प्रभु भक्ति ॥
प्रेम प्रभु से कभी किया होता दीनवत्सल को दिल दिया होता
प्रभु प्रीतम को क्यूँ भूला बैठे ॥ प्रभु भक्ति ॥
दास विषयों का रात दिन होके शुभकर्मों के खो दिए मौके
दाग चोले पे क्यूँ लगा बैठे ॥ प्रभु भक्ति ॥
तुझको इक दिन जरूर जाना है कर्म ही जीव का ठिकाना है
चक्र में घूम के क्यूँ आ बैठे ॥ प्रभु भक्ति ॥
(दीनवत्सल) गरीबों पर कृपा करनेवाला, छोटों का स्नेहवान










