जवानो तुम्हारी, जवानी कहाँ है?
जवानो तुम्हारी,
जवानी कहाँ है?
तेरी वीरता वो,
पुरानी कहां है?
जिन्हें आसमां के,
सितारों ने देखा
जिन्हें आजमां के,
हजारों ने देखा तुम्हारी वो
जोशे-जवानी कहां है?
कहां है तुम्हारी,
समर की कलाएं ?
चमकती कटारें,
फड़कती भुजाएं मचलती
हुई जिन्दगानी कहां है?
तुम्हीं ने जहां में,
उजाला किया है
कहा जो जुबां से,
वो पूरा किया है
तेरे रक्त में,
वो रवानी कहां है?
उठो आर्य वीरो !
जगत को जगा
दो उमंगे तरंगे,
धरा पर बिछा दो
वतन की तुम्हें,
पासवानी कहां है?










