शिवरात्री मुबारक हो सबको

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शिवरात्री मुबारक हो सबको

शिवरात्री मुबारक हो सबको,
जो शिव की खोज कराती है।
जो सोए पड़े मुसाफिर हैं,
ये उनको आज जगाती है।।

ज्योतिर्मय पुण्य धरा पर अब,
अति छाया घना अन्धेरा है।
जागो ऋषिवर की सन्तानो,
इस बात की याद दिलाती है।।

दानवता सैन्य वाहिनी ने,
धरती को चहुँ दिश घेरा है
तुम उठो सपूतो शिवरात्रि,
स्वाभिमान के दीप दिखाती है।।

इस देश धर्म की रक्षा हित,
निर्वाण किया ऋषि ने अपना।
यह क्रान्ति भावना दी हम को,
बलिदान हमें जो सिखाती है।।

इस दिन ऋषिवर को बोध हुआ,
स्वेच्छा से घर को त्याग दिया।
त्यागी ही सब कुछ कर सकता,
यह बात हमें समझाती है।।

ईटें, पत्थर खाकर ऋषि ने,
हमें अमृत प्याला पिला दिया।
रवि शशि वन्दना सब आर्यों को,
अब याद ऋषि की आती है।।