मानिये दुलारी मेरा कहना
मानिये दुलारी मेरा कहना
इस भांति रहना जा के ससुराल में।
सब कुछ पड़ेगा बेटी सहना पर
कुछ ना कहना जा के ससुराल में।।
छोड़ के चली है बाबुल का अंगना
सखियाँ-सहेलियाँ भी कोई
तेरे संग नाअपने घर का मान
रखना आन-बान-शान रखना,
जिन्दगी बिताना स्वाभिमान बोलिये
मधुर जैसे मैना।। … इस भाति रहना
से पि के समान अपने ससुर जी को जानना,
गता के समान अपनी सासू जी को मानना
जेठानी का आदर करना देवरानी से प्यार
करना प्यारी समझना अपनी जान से आखिर
वो भी है तेरी बहना ।। … इस भांति रहना
कण्ठ श्री कण्ठ तेरा कोयल के समान हो,
होठों की लाली तेरी मधुर मुस्कान हो भलाई
की बिन्दिया तेरी नेकी नथनीया तेरी पहन
कर चली जा बेटी शान से लज्जा है बेटी
तेरा गहना ।। …. इस भांति रहना.
कभी-कभी सास तेरी कड़वे बोल बोलेगी,
मार-मार ताने तेरे हृदय को छोलेगी कभी
कुछ भी बोलना ना अपना मुंह खोलना ना,
कभी भी न कहना तू जुबान से नीचे झुकाये
रखना नैना ।। … इस भांति रहना
आये जो अतिथि घर पे करना सत्कार
तू जोड़ करके रखना अपना सारा परिवार
तू दोनों समय संध्या हवन सुगन्धि से भरना
भवन लगन तू लगाना भगवान से प्रभु सा
बेमोल कोई है ना।।… इस भांति रहना.










