ओम नाम मधुर नाम गाये जा रे
ओम नाम मधुर नाम गाये जा रे,
प्राणी बोल के रस घोल के
अपना बना ले दिल में बसा ले,
अनमोल जीवन सफल बना ले…।।
जिसके जप से बुद्धि विमल हो जाती है,
शंकायें निर्मूल सकल हो जाती है।
प्रति पल-पल आनन्द आंतरिक होता है,
जिसके जप से मन अति हर्षित होता है।
इसको ही गाले दिल में बसा ले,
जीवन अपना सफल बना ले…।।
जो अनुपम ब्रह्माण्ड की रचना करता है,
जो प्रीतम प्राणेश सकल दुःख हरता है।
देशभक्त प्रभु भक्त ही जिसको प्यारा है,
निर्बल दुखिया दीन का एक सहारा है।
उसको ही ध्याले प्रीत लगा ले,
अनमोल जीवन सफल बना ले….।।
जिससे जगमग ज्योतिमान नभ मण्डल है,
अनुपम आनन्द निष्कपट निश्छल है।
थायोग्य कर्मों का जो देता फल है,
निराकार निर्लिप्त निरंजन निर्मल है।
उसको मना ले अपना बना ले,
जीवन अपना सफल बना ले…..।।
इधर-उधर दर-बदर भटकता क्यों नर है,
अणु-अणु में कण-कण में व्यापक ईश्वर है।
वेगराज हर इक दिल में प्रभु का घर है,
फिर किस का डर जग रक्षक जगदीश्वर है।
उसको ही गाले ध्यान लगा ले,
अनमोल जीवन सफल बना ले….।।










