बनो आर्य खुद और जहां को बना दो।
बनो आर्य खुद और
जहां को बना दो।
जो कहते हो दुनियां
को करके दिखा दो।।
प्रभु एक है वेद
है उसकी वाणी।
ये पैगाम स्वामी का
घर-घर सुनादो।।
न ऋषियों की तहजीब
मिट जाये वीरों।
मिटाये जो इसको
उन्हें तुम मिटा दो।।
हंसाओ न दुनियां को
लड़-लड़ के नाहक ।
समाजों में उल्फत
की गंगा बहा दो।।
जहालत की दीवारें
अब तक खड़ी हैं।
उठो और इन्हें देखो
जड़ से हिला दो।।
भटकते बहुत तिश्ना
लब फिर रहे है।
‘मुसाफिर’ उन्हें जामे
बदहत पिला दो।।










