धीरे-धीरे घटती जाये सारी रे उमरिया।

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धीरे-धीरे घटती जाये, सारी रे उमरिया। (तर्ज- नगरी नगरी द्वारे-द्वारे ढूंदू रे)

धीरे-धीरे घटती जाये,
सारी रे उमरिया।
दुनियां के मेले में लुट गई,
जीवन की गठरिया ।।

साथी नहीं किसी का कोई,
झूठे सपने प्यार के।
माया के सब तोड़ के बन्धन,
हो जा भव से पार रे।
चलता-चलता जा पहुंचेगा,
प्रीतम की नगरिया।
धीरे…

झूठे गर्भ में मदमाता है
माटी में मिल जायेगा।
हीरा जन्म अनमोल है
यह फिर पीछे पछतायेगा।
पल-पल जीवन बीता जाए,
कल की क्या खबरिया।
धीरे…

ढूंढ रहा है जिसको प्यारे,
भीतर है भगवान रे।
मुक्ति तेरे द्वारे खड़ी है,
क्यों भूला नादान रे।
पग-पग पगला ठोकर खाये,
पाई ना डगरिया।
धीरे…