बन्धु रे! भजन बिना भी क्या जीना।

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बन्धु रे! भजन बिना भी क्या जीना।

बन्धु रे! भजन बिना भी क्या जीना।
बिना भजन के संध्या हवन के ।
जीवन ज्योति जले ना।
भजन बिना भी क्या जीना।
जग का फेरा दो दिन का है डेरा।
किसका हमेशा रहा है ठिकाना।।

कोई आये कोई जाये
काल की गाड़ी रुकी ना।
भजन बिना भी क्या जीना-बन्धु रे….
ओ३म् है प्यारा जग का सहारा।
दाता का भी जो दाता है।।

उसी से प्रीति कर ले रे बन्दे।
आनन्द पद यदि तू चाहता है।
काम आयेगा सुख पायेगा
उस दर कोई दुःखी ना।।
भजन बिना भी क्या जीना- बन्धु रे….