लाला लोरिन्दाराम जी

0
11

🌟 लाला लोरिन्दाराम जी: निर्भीक आर्यसमाजी और परोपकारी अधिवक्ता


🧬 जन्म, शिक्षा और वकालत का प्रारंभ

लाला लोरिन्दाराम जी का जन्म सन् 1886 ईस्वी में वर्तमान पाकिस्तान के बन्नू नगर में लाला आयाराम साहब अत्तरा के घर हुआ। बचपन से ही आप मेधावी, तेजस्वी और न्यायप्रिय प्रवृत्ति के थे। प्रारंभिक शिक्षा बन्नू में प्राप्त करने के उपरांत आपने मैट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण की। तत्पश्चात उच्च शिक्षा के लिए लाहौर प्रस्थान किया, जहाँ से आपने एम.ए. और एल.एल.बी. की उपाधियाँ प्राप्त कीं।

शिक्षा समाप्ति के पश्चात आप बन्नू लौटे और अपने बड़े भाई लाला लद्धाराम बी.ए. के साथ मिलकर वकालत करने लगे। शीघ्र ही आपने अपनी प्रतिभा, निडरता और न्याय के प्रति निष्ठा के बल पर समाज में प्रतिष्ठा प्राप्त कर ली। इसके बाद आपने कैम्बलपुर (अब अटक) में वकालत प्रारंभ की। वहीं आप नगरपालिका के सदस्य एवं कुछ समय उपाध्यक्ष भी रहे।


🤝 सामाजिक सेवा, आर्यसमाज से निष्ठा और निर्भीकता

लाला लोरिन्दाराम जी कट्टर आर्यसमाजी होते हुए भी सभी मतों और सम्प्रदायों के लोगों से प्रेम और समान व्यवहार करते थे। कोई भी पीड़ित, निर्धन या अन्यायग्रस्त व्यक्ति जब उनके पास सहायता हेतु आता, तो आप जाति, सम्प्रदाय या धर्म का भेद किए बिना उसकी सहायता करते थे। यही कारण था कि जनता के बीच आपकी ख्याति एक परोपकारी और न्यायप्रिय अधिवक्ता के रूप में फैल गई।

आप उन अभियोगों को भी निर्भय होकर स्वीकार करते थे जिन्हें अन्य वकील जान के भय से लेने में डरते थे। आपकी अदालत में प्रस्तुतियाँ तार्किक, प्रभावशाली और सत्यनिष्ठ होती थीं। किंतु यही गुण कुछ स्वार्थी और आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों को रास नहीं आए और वे आपके शत्रु बन गए।


षड्यंत्र, बलिदान और स्मृति

एक बार षड्यंत्रपूर्वक आपको एक झूठे मुकदमे में पेश होने हेतु खोहट ले जाया गया, जहाँ रास्ते में आपकी हत्या की योजना थी। परंतु जब आप हसन अब्दाल पहुँचे, तो भारी वर्षा के कारण आपने मार्ग बदल दिया और इस प्रकार ईश्वरकृपा से बच निकले। लौटकर आपने पुलिस को इस षड्यंत्र की सूचना दी।

कुछ समय पश्चात्, नवम्बर 1934 की एक रात, एक व्यक्ति ने आपके द्वार पर आकर किसी बहाने से नीचे बुलाया और गोली चला दी। घायल अवस्था में आपको रावलपिंडी ले जाया जा रहा था, परंतु मार्ग में ही आपने देह त्याग दी।

आपकी मृत्यु से सम्पूर्ण नगर शोकसंतप्त हो गया। आपकी अर्थी बड़े सम्मान एवं वैदिक विधि से उठाई गई। नगर में हड़ताल की गई और नगर के प्रतिष्ठित नागरिक अंतिम यात्रा में सम्मिलित हुए।


🔥 लाला लोरिन्दाराम जी की अमर स्मृति

लाला लोरिन्दाराम जी अपने समय के उन विरले व्यक्तियों में थे जो सत्य, साहस और सेवा के प्रतीक बनकर उभरे। उनकी निडरता, धर्मनिष्ठा और समाजसेवा की भावना आज भी प्रेरणा देती है। आज कैम्बलपुर नगर उनके जैसा परोपकारी, निर्भीक और न्यायप्रिय नागरिक खोजता है – परंतु ऐसे व्यक्तित्व विरले ही जन्म लेते हैं।

NOTE-ये लोरिंद राम जी की असली तस्वीर नहीं है.