प्रभुजी मेरे मन ने दर सके सपने लिए संजोए

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प्रभुजी मेरे मन ने दर सके सपने लिए संजोए

तर्ज: ऐरी मैं तो प्रेम दिवानी
छोड़ ना पाऊँ जग के बन्धन जनम जनम गए बीत

है अन्जानी ये मति मेरी तरसे पागल प्रीता

प्रभुजी मेरे मन ने दर सके सपने लिए संजोए ॥

प्रभु तेरी ! प्रीत है साँची तेरा दर्शन किसविध होय ॥

श्रद्धा के फूलों की माला भक्ति का संगीत

तुझे रिझाने तेरे दर पे लाया अपनी प्रीत

दरस को तरसे ये मन मेरा अंसुवन नैन भिगोय ॥ तेरी प्रभु प्रीत…

विषय विकार लपट बन जाए पापी मन प्रभु रोय

राह ना सूझे तुझ बिन दाता सुधबुध मति सब खोय

पगपग मन भरमाए प्रभुजी राह दिखा दे मोहे

घायल की गति तू ही जाने और न जाने कोय ॥ तेरी प्रभु प्रीत….

सब कुछ तेरा ना कुछ मेरा तेरा संग ही सोहे

और न कुछ मैं चाहूँ तुझसे दरस दिखा दे मोहे

कितने गँवाए जनम प्रभुजी पाप को बोझा ढोय ॥ तेरी प्रभु प्रीत…

प्यार दुलार मैं तुझसे माँगूँ मन प्रभु तुझमें खोय

मात पिता मैं तुझको मानूँ बन्धु सखा तू होय

टेर सुनेगा कौन मेरी ना जग में तुझ बिन कोय

बिनती प्रभु मेरी तारो नैया माँझी मानूँ तोहे ॥ तेरी प्रभु प्रीत…